॥ श्री कृष्ण आरती ॥

जय श्याम सुंदर, मुरलीधर।
भक्तजन हृदय हरि भर॥
मुरली की तान सुनि मोर मुकुट धारी।
गोपियों के मन में बसो प्यारी प्यारी॥
जय गोविंद, जय माधव।
भवसागर तारक प्रभु प्रभु राधाव॥
गोकुल नंदन, यशोदा नंदन।
कृष्ण प्यारे कान्हा, देवकान्तक नंदन॥
वृंदावन के वासी, रास रचावै।
सत्य और धर्म की राह दिखावै॥
माखन मुरली के संग खेली लीला।
भक्तजन का संकट हरै, संकटमोचन जीला॥
सकल लोक में करे कृपा अपार।
सदा रक्षक भक्तों के, सुख का आधार॥
जो कोई भक्त भाव से गावे।
कृष्णजी की आरती, हर दुःख मिटावे॥
दोहा:
आरती श्री कृष्ण की, भक्ति भाव से गाओ।
सकल जीवन मंगलमय हो, राधा संग प्रेम पाओ॥
drcvraman.online , homijehangirbhabha.space , lalalajpatrai.online , chhatrapatishivajimaharaj.space , maharanapratap.space